व्यवहार पवित्र और शुद्ध होना चाहिए। नौकरीपेशा, बिजनसमैन, साधु-संत या फिर क्यों न गृहस्थ ही क्यों न हो आपका व्यवहार ऐसा होना चाहिए जिससे किसी को हानि न पहुंचे। अपनी मर्यादा में रहकर निरंतर आगे बढ़ते रहने चाहिए।
व्यवहार पवित्र और शुद्ध होना चाहिए। नौकरीपेशा, बिजनसमैन, साधु-संत या फिर क्यों न गृहस्थ ही क्यों न हो आपका व्यवहार ऐसा होना चाहिए जिससे किसी को हानि न पहुंचे। अपनी मर्यादा में रहकर निरंतर आगे बढ़ते रहने चाहिए।