दरअसल, यह एक कहावत है जिसका इस्तेमाल गरीबी और अभाव को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह मुहावरा भारत में, खासकर ग्रामीण इलाकों में काफी प्रचलित है।
दरअसल, यह एक कहावत है जिसका इस्तेमाल गरीबी और अभाव को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह मुहावरा भारत में, खासकर ग्रामीण इलाकों में काफी प्रचलित है।