अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो

तुम्हारी आँखों की तौहीन है

ज़रा सोचो तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है सो जाते हैं फ़ुटपाथ पे अख़बार बिछा कर मज़दूर कभी नींद की गोली नहीं

खाते कुछ बिखरी हुई यादों के क़िस्से भी बहुत थे कुछ उस ने भी बालों को खुला छोड़ दिया था

जिससे शरीर के अलग-अलग हिस्सों में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति बढ़ती है

गर कभी रोना ही पड़ जाए तो इतना रोना आ के बरसात तिरे सामने तौबा कर ले

ये सोच कर कि तिरा इंतिज़ार लाज़िम है

तमाम उम्र घड़ी की तरफ़ नहीं देखा हर चेहरे में आता है

नज़र एक ही चेहरा लगता है कोई मेरी नज़र बाँधे हुए है किसी दिन मेरी रुस्वाई का ये कारन न बन जाए तुम्हारा शहर से जाना मिरा बीमार हो जाना

कैसे होने चाहिए दोस्त? गौर गोपाल दास ने बताया