भारत में किसने किया था अंग्रेजों का स्वागत?

1600 ई. में कुछ अंग्रेज व्यापारियों ने इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ से भारत के साथ व्यापार करने की अनुमति ली। उस समय भारत पर मुगल बादशाह जहांगीर का शासन था।

उस समय तक पुर्तगाली यात्रियों ने भारत के लिए समुद्री मार्ग की खोज कर ली थी। उस मार्ग की जानकारी प्राप्त करने और व्यापार की तैयारी करने के बाद 1608 में 'हेक्टर' नामक जहाज इंग्लैंड से भारत के लिए रवाना हुआ।

इस जहाज के कप्तान का नाम हॉकिन्स था। हॉकिन्स का जहाज सूरत के बंदरगाह पर रुका, जो उस समय भारत का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र था। हॉकिंस अपने साथ इंग्लैण्ड के राजा जेम्स प्रथम का एक पत्र जहांगीर के नाम लाया था।

हॉकिन्स ने खुद को जहांगीर के दरबार में राजदूत के रूप में प्रस्तुत किया था। चूंकि वह इंग्लैंड के सम्राट के राजदूत के रूप में आया था, इसलिए जहांगीर ने भारतीय परंपरा के अनुसार अतिथि का विशेष स्वागत किया और उसे सम्मान दिया।

उस समय तक पुर्तगाली कालीकट में अपना डेरा जमा चुके थे और भारत में व्यापार कर रहे थे। हॉकिन्स भी व्यापार करने आया था,

लेकिन जहांगीर की दयालुता और उदार व्यवहार को देखकर उसने मौके का पूरा फायदा उठाया। उस समय जहांगीर को भी नहीं पता था कि इस ब्रिटिश समुदाय के वंशज भारत पर शासन करेंगे।

हॉकिन्स ने जहांगीर को पुर्तगालियों के खिलाफ भड़काया तथा जहांगीर से कुछ विशेष सुविधाएं और अधिकार भी प्राप्त किये।

इस उपकार के बदले में उसने अपनी सैन्य शक्ति का निर्माण किया और पुर्तगाली जहाजों को लूट लिया, जिससे उनका व्यापार ठप्प हो गया।

इस तरह उसने 1613 में बादशाह जहांगीर की ओर से एक शाही फरमान जारी करवा लिया कि अंग्रेजों को सूरत में फैक्ट्री बनाकर व्यापार करने की इजाजत दी जाती है।