आधी रात में ही चुपचाप क्यों किन्नरों का अंतिम संस्कार?

माना जाता है कि किन्नरों को मौत का आभास हो जाता है.

तब वो कहीं आना-जाना और खाना बंद कर देते हैं. केवल पानी पीते हैं.

किन्नरों में मान्यता है कि मरणासन्न किन्नर की दुआ काफी असरदार होती है.

मृत्यु होने पर उनकी शवयात्रा चुपचाप आधी रात में ले जाई जाती है.

किन्नरों में शव को खड़ा करके अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाता है.

मान्यता है कि आम लोग अगर मृत किन्नर का शरीर देख भी लें तो मृतक को दोबारा किन्नर का ही जन्म मिलता है.

शव यात्रा से पहले मृतक को जूते-चप्पलों से पीटा और गालियां दी जाती हैं.

जिससे मृत किन्नर ने जीते-जी अगर कोई अपराध किया हो तो उसका प्रायश्चित हो जाए, अगला जन्म इंसान का मिले.

किन्नर की मौत के बाद पूरा समुदाय एक सप्ताह तक व्रत करता है.